Wednesday, 14 November 2012

लीलाधारी भगवान् : श्री कृष्णा

सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। दीपावली के अगले दिन गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा के इस पर्व पर पूरा देश व्यस्त है। हो भी क्यों न आखिर हमारे नन्दकिशोर, सांवरे कन्हैया के अपने भक्तो से अगाध प्रेम से जुडा है ये पर्व। कहते है कि जब इंद्र को अपने भगवान् होने का अभिमान हो गया तो लीलाधारी श्री भगवान् विष्णु के अवतार मेरे कृष्ण ने इंद्र के अभिमान को दूर करने के लिए एक लीला रची। जब समस्त ब्रज इंद्र की पूजा की तैयारी में डूबा हुआ था तब कन्हैया ने यशोदा से पूछा "आप किसकी पूजा की तैयारी कर रही है" तब यशोदा माता ने कहा  "भगवान् इंद्र की" कन्हैया द्वारा इसका कारण पूछने पर माता ने उत्तर दिया कि भगवान् इंद्र ही वर्षा करतें हैं, जिससे फसल होती हैं, हमारी गायों को चारा मिलता है। इस पर भगवान् श्री कृष्ण ने कहा "तो फिर तो गोवर्धन की होनी चाहिए। क्योंकि हमारी गाये वही जाकर चारा चरती हैं। इंद्र तो दिखाए भी नहीं देते जबकि गोवर्धन तो साक्षात दर्शन देते है।"
इस पर सभी ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा को छोड़कर गोवर्धन की पूजा शुरू कर दी। तभी इंद्र ने क्रुद्ध होकर मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। स्थितियाँ प्रलय जैसी बन गई, तो सभी ब्रजवासियों ने कन्हैया को ही कोसना शुरू कर दिया तभी मेरे दयानिधि, प्यारे मुरली मनोहर, कन्हैया ने अपनी मुरलिया कमर में खुसाई और अपनी कनिष्क पर संपूर्ण गोवर्धन उठा डाला। जिसकी छांव में समस्त ब्रजवासी, गोपी, ग्वाले, गाये  7 दिन तक रहे, सब कान्हा का गुणगान करने लगे, उनकी जय जयकार करने लगे। तब भगवान् कृष्ण ने हर वर्ष गोवर्धन की पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने को कहा। और इस प्रकार हम प्रतिवर्ष यह पर्व भक्तिविभोर होकर मनाते है। 
बोलिए ब्रन्दावन बिहारी लाल की जय। मुबारक हो आप सभी को ये प्यारा सा कन्हैया का ये पर्व।
पर मेरे देशवासियों जरा भारत की संतान होने का भी कर्ज चुकाना। आज मेरे चाचा नेहरु जी का जन्मदिन है कहीं भूल न जाना।
भारत को मिली स्वतंत्रता में इनका भी एक विशेष योगदान रहा है। बहुत से लोगों का यह विचार रहा है कि अन्य लोगों की तुलना में नेहरु जी का स्वतंत्रता प्राप्ति में बहुत कम योगदान है। आलचोना हर किसी का काम है, पर हमारा फर्ज ये है कि हम हर उस व्यक्ति को याद करें जिसका थोडा भी योगदान स्वतंत्रता प्राप्ति में रहा हो। क्योंकि हमारे देश की राजनीति के आगे तो लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, मंगल पांडे, बेगम हजरत महल, नाना साहब जैसे वीरों का तो कोई नाम तक नहीं लेता जिन्होंने भारत की आजादी की चिंगारी भड़काई थी। कब उनका जन्म कब हुआ कब वो शहीद हो गए किसी आम आदमी को तक को क्या हमारे देश के महान नेताओं को भी नहीं पता होगा।
जय हिन्द
जय भारत 

By- Swati Gupta

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