Sunday, 11 November 2012

कौन रहता हैं इस शहर में


कौन रहता हैं इस शहर में ,

अनजाने लोग जहा मिलते है अब

कौन रहता है इस शहर में,

रातो के साए जहा आते नहीं अब

बंद दरवाजे है , खिड़की पर ताले है ,

चोखट पर धुल नहीं है अब

कौन रहता है इस शहर में .....

ख्वाब तलाशने निकलना है ,
खुली आँखों से नींद आती नहीं अब

आसमान का रंग बदल चूका है ,
पानी में भी तस्वीर नहीं दिखती अब

मुस्कराहट की याददाश्त खो चुकी है ,
आंसुओ के सैलाब हर कदम पर है अब



कौन रहता है इस शहर में .....

विचारों की परछाई दिख रही है ,
राज़ बेघर हो गए है यहाँ अब

सिक्को की आवाज़ अब सुनाई देती नहीं ,
हवाओ में उड़ती है रोशनी उनकी अब

जिंदगी से बेवफाई सबने की है ,
और मौत से डरते है सब

बचपन में जवानी ,जवानी में बुढापा है ,
मौत के बाद भी चैन नहीं है अब

कौन रहता है इस शहर में .....

(चिराग )

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