जिंदगी कुछ पल के लिए ठहर जाना चाहती है ।
जिंदगी कुछ पल के लिए ठहर जाना चाहती है ।
इस सफ़र मे अब थोड़ा रुक जाना चाहती है ।।
छाले पद गये मंज़िलों की राह पर चलते चलते ।
अब खामोश रहकर दर्द को छुपाना चाहती है ।।
उथल पुथल इस जिंदगी की तमाम हसरतें मिट गई ।
वो बिना शिकवा यूँ ही गुजर जाना चाहती है ।।
हर रोज उलझनों मे हसी कही गुम हो गई ।
अब सम्हल करके थोड़ा मुस्कराना चाहती है ।।
जिंदगी कुछ पल के लिए ठहर जाना चाहती है ।
इस सफ़र मे अब थोड़ा रुक जाना चाहती है ।।
स्वाती गुप्ता
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