Monday, 17 September 2012

स्टोरी पर हावी होता स्टारडम

दर्शक हमेशा से यह मांग करता रहा है की उसे मनोरंजन के नाम पर फिल्मो से एक बेहतरीन कहानी मिले, मगर उस समय इन समझदार दर्शको की समझदारी कहाँ चली जाती जब वो फिल्म के नाम पर अपने पसंदीदा अभिनेता और अभिनेत्रियों को देखने जाते हैं और बे सर-पैर की फिल्मो को कमाई में १००-२०० करोड़ का आकड़ा पार करा देती है
        एक तरफ तो हमारे देश की जनता ये कहती की हमारी फिल्मे उस स्तर की नहीं होती की वो "ऑस्कर" जैसे सम्मानित पुरस्कार जीत सके, दूसरी तरफ वही जनता उन अच्छी फिल्मो को देखने से नकार देती है जो पुरस्कारों के लायक होती हैं , तो अब सोचने वाली बात ये है की अगर फैन्स इसी तरह अपने पसंदीदा चेहरे को देखने के लिए ही अगर फिल्म हॉल जाते रहे तो फिर किस तरह हमारी फिल्मो का स्तर सुधरेगा

 

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