सिलिंडर से दबा और पेट्रोल से फिर जला आम आदमी
सैयां तो खूब ही कमात हैं....पर सखी जी सैयां चाहे जितना कमा लें पर बजट तो बिगड़ा ही रहेगा । १४ सितम्बर की रात ३ बजे से गैस सिलेंडर पे और डीजल पे एक बार फिर दाम बढा दिए गए। अब बेचारा आम आदमी कोशिश करके अपने बजट को पटरी पर ठीक से ला भी नहीं पाता कि सरकार फिर से उसे मजबूर कर देती है अपने बजट को पटरी पर लाने और जूझने के लिए।
सरकार तो आक्रोशित और उबलती हुई जनता अपनी उछलती हुई कीमतों का बजट पेश कर-कर के नया तड़का मारती रहती है। जिसका फायदा भले ही आम जनता को तो कुछ न हो पर विपक्षी दल इसे खूब भुनाते हैं और विरोध का डंका पीट पीट कर जनता के सामने उनके हितकारी बनने का ढोंग करते हैं । मै एक सवाल इन विरोध कर रहे नेताओं से भी करूंगी कि अगर वो जनता के इतने ही हितकारी हैं तो फिर वो अपना समर्थन सरकार से खींच क्यों नहीं लेते?
पर न भाई न, आप ऐसा क्यों करेंगे ? क्योंकि आप तो कुर्सी के हितकारी है, जनता के नहीं, हम जानते है जनाब, कि आप महंगाई की आड़ में अपना खाना बहुत अच्छी तरह पका रहें हैं ।
चलिए छोडिये पर जनता की भी दाद देनी पड़ेगी हर बार महंगाई बढ़ने पर रो लेते है और मन ही मन गालियाँ देकर २०१४ का इन्तजार करने लगती है । जनता से मै ये कहना चाहूंगी कि २ वर्ष मतलब ७३० दिन जिन्दा रहने के लिए आपको खाने की जरूरत होगी और अगर ऐसा ही चलता रहा तो ये सरकार एक दिन हमारे दो वक्त के खाने के लिए भी लाले कर देगी ।
अब वक्त आ गया है कि हमें सरकार को दिखा देना है कि अगर हम सरकार खड़ा करने का दम रखते है तो उसे गिराने की हिम्मत भी रखते हैं।
जय हिंद, जय भारत
स्वाती गुप्ता
सरकार तो आक्रोशित और उबलती हुई जनता अपनी उछलती हुई कीमतों का बजट पेश कर-कर के नया तड़का मारती रहती है। जिसका फायदा भले ही आम जनता को तो कुछ न हो पर विपक्षी दल इसे खूब भुनाते हैं और विरोध का डंका पीट पीट कर जनता के सामने उनके हितकारी बनने का ढोंग करते हैं । मै एक सवाल इन विरोध कर रहे नेताओं से भी करूंगी कि अगर वो जनता के इतने ही हितकारी हैं तो फिर वो अपना समर्थन सरकार से खींच क्यों नहीं लेते?
पर न भाई न, आप ऐसा क्यों करेंगे ? क्योंकि आप तो कुर्सी के हितकारी है, जनता के नहीं, हम जानते है जनाब, कि आप महंगाई की आड़ में अपना खाना बहुत अच्छी तरह पका रहें हैं ।
चलिए छोडिये पर जनता की भी दाद देनी पड़ेगी हर बार महंगाई बढ़ने पर रो लेते है और मन ही मन गालियाँ देकर २०१४ का इन्तजार करने लगती है । जनता से मै ये कहना चाहूंगी कि २ वर्ष मतलब ७३० दिन जिन्दा रहने के लिए आपको खाने की जरूरत होगी और अगर ऐसा ही चलता रहा तो ये सरकार एक दिन हमारे दो वक्त के खाने के लिए भी लाले कर देगी ।
अब वक्त आ गया है कि हमें सरकार को दिखा देना है कि अगर हम सरकार खड़ा करने का दम रखते है तो उसे गिराने की हिम्मत भी रखते हैं।
जय हिंद, जय भारत
स्वाती गुप्ता
Labels: National


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