Thursday, 7 June 2012

इस कदर हों रहे है इन्शानियत के टुकड़े

आमिर का शो सत्यमेव जयते देखते हुए मुझे उन लोगो की याद दिला दी जिन पर सिर्फ प्यार का इल्जाम है जिन को समाज के ठेकेदारों ने फ़ासी और एनकाउन्टर की सजा सुना दी (खाप पंचायत) समेत दर्जनों समाज के ठेकेदारो ने अनगिनत प्रेमियों को मौत के घाट उतार दिया उनका गुनाह सिर्फ इतना था की उन्होंने सिर्फ प्यार किया था प्यार जिसे हम सब पूजते है (राधा कृष्ण) के रूप में फिर इन समाज के लोगो को ये क्यों नहीं दिखता के आखिर वो उनके बच्चे है मेरी एक विनती है उन सभी समाज के लोगो से जिनके पालन पोषण एवं पढाई लिखाई में उन्होंने जिन्दगी गुजार दी उन्हें अच्छा इन्सान बनाया फिर उन पर भरोसा क्यों नहीं कर सकते क्या उनकी मेहनत ने उन बच्चो को अपना जीवन साथी चुनने की क़ाबलियत नहीं दी जो बच्चा अपने माँ बाप को भगवान से पहले पूजता हों उसने सिर्फ प्यार कर लिया और उसे समाज से बहिस्कृत करते हुए मौत के घाट उतार दिया इतना बड़ा पाप ,कौन होगा इसका जिम्मेवार सिर्फ वो माँ बाप या समाज के वो भ्रष्ट ठेकेदार जो हर बार यही कह कर सजा सुना देते है की ये सिर्फ काम वासना के शिकार है और उन्हें म्रतुदंड दे दिया जाता है
,अगर ये काम वासना है तो फिर हमारे कई सारे न्यूज़ चैनल्स ने दिखाया की एक घर में एक बहू के साथ घर के सारे पुरुषो ने शारीरिक सम्बन्ध बनाया जिनमे बुजुर्गो का नाम सबसे पहले आया वो क्या है और उन्हें सिर्फ १ या २ साल की सजा या फिर उमर कैद उनका एनकाउन्टर क्यों नहीं हुआ उन्हें फ़ासी क्यों नहीं दी गयी , इस पर हम सबको शर्मिंदा होना है


मनीष शुक्ल

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