Sunday, 17 June 2012

कलाम की दावेदारी को मिलेगा सिर्फ देश प्रेमियों का समर्थन

राष्ट्रपति पद को लेकर हो रही जंग से एक बात साफ़ हो  चुकी है कि जिस तरह अब्दुल कलाम के आलावा  सभी दावेदारों ने समर्थन  पाने  कि कवायद को जोर दिया है उस से यह बात पूरी तरह साफ़ होचुकी है कि उन सभी  को देश को  एक साफ़  व्यक्तित्व का राष्ट्रपति दिलाने से ज्यादा इस बात की  परवाह है कि वो किसी न किसी तरह इतिहास में अमर हो जायें । 
 बात अगर देश केराष्ट्रपति कि करें तो एक ऐसे  इंसान को  इसका दावेदार  बनाना चाहिए जो इस पद की गरिमा को सँभालने के योग्य हो एवं वह सन्यासी स्वाभाव का होने के साथ-साथ अपना हर कदम और प्रयास देश की तरक्की की तरफ  उठाये , तो ऐसी स्तिथि  में अब्दुल कलाम  को इस पद के लिए सर्वोच्च  माना  जा सकता है । अगर तुलना की जाये तो जहां सभी दावेदार लम्बे समय से  राजनितिक पदों पर होने पर होने के बावजूद  देश के लिए जितना कुछ न कर पाने में सक्षम रहे हैं वहीँ कलाम का योगदान देश की प्रगति में अतुल्य है ।

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